क्या भारत vs पाकिस्तान का मैच होगा रद्द। राजनीतिक पार्टियां कर थे बंपर विरोध। सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई दाखिला जाने पूरी खबर
भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले बहुप्रतीक्षित क्रिकेट मैच पर अब बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ क्रिकेट प्रेमी इस महामुकाबले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इसके आयोजन पर कड़ा विरोध जता रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि पाकिस्तान लगातार सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देता है और ऐसे में उससे मैत्रीपूर्ण खेल संबंध रखना उचित नहीं है।
मैच का आयोजन
यह मुकाबला Asia Cup 2025 का हिस्सा है, टूर्नामेंट की शुरुआत 9 सितंबर से होने वाली है और फाइनल 28 सितंबर को होना है।
भारत और पाकिस्तान का यह मुकाबला ग्रुप ए के मैचों में से एक है, जो 14 सितंबर को दुबई जिले में खेला जाएगा।
राजनीतिक-समाजिक विवाद
- पहलगाम आतंकी हमला (22 अप्रैल 2025) और बाद में ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहरा आक्रोश है।
- कुछ राजनीतिक पार्टियों तथा आम नागरिकों ने इस मैच को रद्द करने की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि देशभक्त भावना के साथ यह मैच चलाना सही नहीं है जब सैनिकों और आम लोगों को नुकसान हुआ हो।
- कुछ लोगों ने टीवी न चलाने, मैच को जनता द्वारा बहिष्कृत करने की अपील की है।
- राजनीतिक दलों का कहना है कि जब देश के जवान सीमा पर शहीद हो रहे हैं, तब पाकिस्तान के साथ खेल संबंध रखना शहीदों के बलिदान का अपमान है।
- कई राज्यों में क्रिकेट बोर्ड और स्टेडियमों के बाहर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने टिकट जलाकर, पोस्टर फाड़कर और नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
इस विवाद ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। देश की सर्वोच्च अदालत में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें भारत–पाकिस्तान मैच पर रोक लगाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और भावनात्मक माहौल को देखते हुए पाकिस्तान से किसी भी प्रकार का खेल संबंध रखना जनता की भावनाओं के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया है।
क्रिकेट बोर्ड की दलील
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भारत–पाकिस्तान मैच को लेकर जो दलील दी है, वह मुख्य रूप से कानूनी और आर्थिक पहलुओं पर आधारित है। बोर्ड का कहना है कि:
1. यह मुकाबला ICC के शेड्यूल का हिस्सा है, जिसे एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता।
2. मैच से पीछे हटने पर भारत पर भारी जुर्माना और अनुबंध उल्लंघन का आरोप लगेगा।
3. करोड़ों–अरबों रुपये के प्रसारण अधिकार, टिकट बिक्री और स्पॉन्सरशिप दांव पर हैं।
कानूनी तौर पर:
बोर्ड की दलील मजबूत है क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय संस्था (ICC) के नियमों से बंधा है। अचानक मैच रद्द करने पर भारत की क्रिकेट प्रतिष्ठा और भविष्य की मेज़बानी अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
आर्थिक दृष्टि से:
यह सच है कि इस मैच से भारतीय क्रिकेट को बड़ी आमदनी होती है, जिसे अनदेखा करना मुश्किल है।
नैतिक और भावनात्मक दृष्टि से: यही पर BCCI की दलील कमजोर पड़ती है। जनता और राजनीतिक दलों का कहना है कि जब पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तब सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए खेलना राष्ट्रीय भावनाओं के विपरीत है।
जनता की मिली-जुली राय
जनता के बीच इस मामले को लेकर बंटे हुए विचार सामने आ रहे हैं। एक बड़ा वर्ग मानता है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार का सांस्कृतिक या खेल संबंध तुरंत खत्म होना चाहिए। वहीं, खेल प्रेमियों का कहना है कि क्रिकेट को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए और यह मुकाबला खेल भावना को बढ़ावा देगा।
पूरे मामला का निष्कर्ष
14 सितंबर के मुकाबले को लेकर स्थिति कुछ इस तरह बनी हुई है:
मैच होने की पूरी संभावना है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करने की याचिका नहीं मानी, BCCI और सरकार ने मल्टीनेशनल इवेंट्स में हिस्सा लेने का फैसला किया है।
हालाँकि, राजनीतिक दबाव, सामाजिक भावना, और भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ गहरी हैं, जो इस मैच की पृष्ठभूमि को सामान्य मुकाबले से अलग कर रही हैं।
मैच सिर्फ खेल नहीं बल्कि प्रतीकात्मक हो गया है — राष्ट्रवादी भावनाएँ, नीति-निर्माता निर्णय, और सार्वजनिक दृष्टिकोण इस मुकाबले को कई अर्थों में महत्व देते हैं।
Also read:-
कौन होगा CM उम्मीदवार? तेजस्वी की दावेदारी पर कांग्रेस चुप, INDIA गठबंधन में दरार के संकेत!






