नीतीश कुमार के किले में सेंध: बिहार 2025 चुनाव से पहले नेताओं का JDU से पलायन

By himanshu gupta

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नीतीश कुमार के किले में सेंध

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नीतीश कुमार (JDU) को लगा बड़ा झटका। कई नेताओं ने दिया JDU पार्टी को इस्तीफा जाने पूरी खबर

बिहार की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) को बड़ा झटका लगा है। पूर्व विधायक मीना द्विवेदी ने अचानक इस्तीफा देकर राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम न केवल जेडीयू की आंतरिक चुनौतियों को उजागर करता है बल्कि आने वाले चुनाव में पार्टी की संभावनाओं पर भी गहरा असर डाल सकता है।

नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। उनके नेतृत्व में जेडीयू ने कई बार सत्ता हासिल की और उन्होंने बिहार को सुशासन के मॉडल से जोड़ने की कोशिश की। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक गठबंधनों में लगातार बदलाव, केंद्र और राज्य स्तर पर रणनीतिक उलझनों तथा संगठनात्मक कमजोरियों के कारण पार्टी की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है। इस्तीफा देने वाले नेताओं का आरोप है कि पार्टी अब अपनी मूल नीतियों से भटक गई है और नेतृत्व से संवाद की कमी है।

पूर्व विधायक मीना द्विवेदी का इस्तीफा।

मीना द्विवेदी, जो लंबे समय से जेडीयू से जुड़ी रही हैं और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं, ने इस्तीफ़े के पीछे पार्टी नेतृत्व से असहमति और कार्यकर्ताओं की अनदेखी को प्रमुख कारण बताया है। सूत्रों के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से पार्टी के कामकाज से नाराज़ थीं और लगातार अपनी उपेक्षा महसूस कर रही थीं।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि मीना द्विवेदी आगे किस राजनीतिक दल का दामन थामेंगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह महागठबंधन या भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो चुनावी समीकरणों पर सीधा असर पड़ेगा और JDU की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।

यह इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार पहले से ही पार्टी के अंदर असंतोष और नेताओं के पलायन का सामना कर रहे हैं। कुछ ही दिनों पहले जेडीयू के कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी। अब मीना द्विवेदी जैसी अनुभवी नेता का जाना साफ संकेत देता है कि संगठनात्मक स्तर पर असंतुलन गहराता जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला नेताओं का पार्टी से किनारा करना जेडीयू के लिए और बड़ा झटका है, क्योंकि इससे सामाजिक समीकरण प्रभावित होंगे। बिहार की राजनीति में महिला वोट बैंक अहम भूमिका निभाता है और मीना द्विवेदी जैसी नेताओं की लोकप्रियता का असर सीधे चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।

 नीतीश कुमार(JDU) के लिए बड़ी मुश्किल: चुनाव से पहले बढ़ा संकट

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU) के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में लंबे समय तक सत्ता का स्वाद चख चुकी यह पार्टी अब गंभीर राजनीतिक संकट से जूझ रही है। नेताओं का लगातार इस्तीफ़ा देना, कार्यकर्ताओं में असंतोष और बदलते राजनीतिक समीकरणों ने जेडीयू की स्थिति को कमजोर कर दिया है।

सबसे बड़ा झटका हाल ही में तब लगा जब पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक मीना द्विवेदी ने इस्तीफ़ा देकर संगठन की अंदरूनी खामियों को उजागर कर दिया। उनका आरोप है कि पार्टी में जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है और नेतृत्व से संवाद की कमी है। मीना द्विवेदी का जाना न केवल जेडीयू के महिला वोट बैंक के लिए बड़ा झटका है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पार्टी अपने ही वरिष्ठ चेहरों को संभालने में नाकाम साबित हो रही है।

यह इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया है जब पहले ही कई छोटे-बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। कुछ ने सीधे विपक्ष का रुख किया है तो कुछ नए राजनीतिक ठिकाने की तलाश में हैं। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि जेडीयू की जमीनी पकड़ कमजोर होती जा रही है।

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हिमांशु गुप्ता | प्रोफेशनल कंटेंट राइटर एवं डिजिटल जनरलिस्ट रचनात्मक लेखन और डिजिटल रणनीति में निपुण, ब्रांड्स और व्यक्तियों को प्रभावशाली कंटेंट व डिजिटल पहचान बनाने में मददगार।

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