Asia Cup 2025: बेटे के 5 गेंद में 5 छक्के, खुशी में पिता को हार्ट अटैक – मौत से मची सनसनी!”

By himanshu gupta

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Asia Cup 2025 में 5 गेंद में 5 छक्के पिटाने के बाद पिता को आई Heart attack हुई पिता की मौत

Asia Cup 2025 में 5 गेंद में 5 छक्के पिटाने के बाद पिता को आई Heart attack हुई पिता की मौत। जाने पूरी खबर

एशिया कप 2025 में भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया मुकाबला भावनाओं और रोमांच से भरपूर रहा। इस मैच का नतीजा तो क्रिकेट इतिहास के पन्नों में दर्ज हो ही गया, लेकिन इसी दौरान मैदान के बाहर घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया। श्रीलंकाई ऑलराउंडर दुनिथ वेल्लालगे (Dunith Wellalage) के पिता का अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जब वेल्लालगे गेंदबाजी कर रहे थे, उसी दौरान भारतीय बल्लेबाज ने उन पर लगातार 5 गेंदों में 5 छक्के जड़ दिए। इस दृश्य को देखकर उनके पिता भावनात्मक रूप से टूट गए और उन्हें दिल का दौरा पड़ा।

मैच का रोमांच और वेल्लालगे की गेंदबाजी

भारत बनाम श्रीलंका के इस हाई वोल्टेज मुकाबले में भारत के बल्लेबाजों ने तूफानी प्रदर्शन किया। मध्य ओवरों में गेंदबाजी करने आए वेल्लालगे पर दबाव तब बढ़ा जब एक भारतीय बल्लेबाज ने लगातार पांच छक्के जड़ दिए। दर्शक दीर्घा में बैठे उनके पिता यह नजारा देख रहे थे और वह तनाव व निराशा से भर गए। परिवार और नजदीकी सूत्रों के अनुसार, इसी तनाव की वजह से उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा।

पिता की हालत बिगड़ने पर अफरा-तफरी

घटना के तुरंत बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश के बावजूद मृत घोषित कर दिया। इस खबर के फैलते ही श्रीलंकाई ड्रेसिंग रूम और पूरा स्टेडियम गमगीन हो गया। टीम मैनेजमेंट ने तुरंत वेल्लालगे को इसकी जानकारी दी। जैसे ही उन्हें पता चला, उनकी आंखों से आंसू झलक पड़े।

क्रिकेट जगत में शोक की लहर

दुनिथ वेल्लालगे के पिता के निधन की खबर से पूरा क्रिकेट जगत सदमे में है। मैदान पर हार-जीत सामान्य बात है, लेकिन किसी खिलाड़ी के निजी जीवन में ऐसा गहरा आघात खेल की सीमाओं से परे जाकर हर किसी को झकझोर देता है। साथी खिलाड़ी, फैन्स और क्रिकेट बोर्ड ने संवेदना जताई है और इस कठिन घड़ी में वेल्लालगे के परिवार के साथ खड़े होने का संदेश दिया है। यह घटना याद दिलाती है कि क्रिकेट केवल खेल नहीं, बल्कि उससे जुड़े इंसानों की भावनाओं और रिश्तों का भी हिस्सा है।

खेल और परिवार का संतुलन

खेल की दुनिया जितनी चमकदार दिखती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी होती है। एक खिलाड़ी जब मैदान पर उतरता है तो वह केवल अपनी मेहनत और प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अपने परिवार की उम्मीदों और भावनाओं का बोझ भी साथ लेकर चलता है। परिवार ही वह आधार है, जो खिलाड़ी को मानसिक मजबूती और प्रेरणा देता है। लेकिन कई बार यही भावनाएं दबाव में बदल जाती हैं और खेल तथा परिवार के बीच संतुलन बनाना बेहद कठिन हो जाता है।

दुनिथ वेल्लालगे की घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है। जब एक खिलाड़ी मैदान पर संघर्ष करता है तो परिवार भी उसी तनाव से गुजरता है। हार-जीत केवल खिलाड़ी की नहीं होती, बल्कि परिवार की भावनाओं को भी प्रभावित करती है। वेल्लालगे पर लगे लगातार पांच छक्के उनके पिता के लिए इतना बड़ा मानसिक झटका साबित हुए कि उनकी जान ही चली गई। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि खिलाड़ियों का जीवन केवल खेल तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनके परिवार की भावनाओं से गहराई से जुड़ा होता है।

परिवार का योगदान खिलाड़ी के करियर में सबसे अहम होता है। बचपन से अभ्यास के लिए समय देना, संसाधनों का इंतजाम करना और मानसिक सहयोग देना—ये सब परिवार की ही भूमिका है। लेकिन इसी दौरान परिवार भी मैदान की हर जीत-हार को उतनी ही गहराई से महसूस करता है। यदि खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करता है तो गर्व और खुशी परिवार के चेहरे पर साफ झलकती है, और यदि असफलता मिलती है तो सबसे अधिक चिंता भी परिवार को ही होती है।

इसलिए जरूरी है कि खेल और परिवार के बीच संतुलन को समझा जाए। खिलाड़ियों को यह जानना होगा कि खेल जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं। वहीं परिवार को भी यह समझना चाहिए कि हार-जीत खेल का स्वाभाविक हिस्सा है और खिलाड़ी को हर हाल में समर्थन देना ही असली ताकत है।

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हिमांशु गुप्ता | प्रोफेशनल कंटेंट राइटर एवं डिजिटल जनरलिस्ट रचनात्मक लेखन और डिजिटल रणनीति में निपुण, ब्रांड्स और व्यक्तियों को प्रभावशाली कंटेंट व डिजिटल पहचान बनाने में मददगार।

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