DU: ABVP की भारी जीत क्या है इसका राज? 3–1 पदों से (ABVP) अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की भारी जीत हुई है। आर्यन मान बने नए President जाने पूरी खबर
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारी जीत दर्ज की है। चार में से तीन पदों पर कब्ज़ा जमाकर ABVP ने यह साफ कर दिया है कि छात्र राजनीति में उसका दबदबा अब भी बरकरार है। DU के नए President 28841 वोटो के साथ आर्यन मान चुने गए है।
DU: ABVP की भारी जीत क्या है इसका राज?
1. मजबूत संगठनात्मक ढांचा
ABVP का सबसे बड़ा हथियार उसका संगठन रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर फैला नेटवर्क, ग्रासरूट तक पहुंच और लगातार सक्रिय कार्यकर्ता इसे अन्य छात्र संगठनों पर भारी बनाते हैं। DUSU चुनाव से पहले ABVP के कार्यकर्ता हर कॉलेज, हर विभाग और छात्रावास में जाकर छात्रों से संवाद करते हैं। यह “डोर-टू-डोर कैंपेन” का असर ही है कि छात्रों को लगता है उनकी समस्याओं को सबसे पहले ABVP सुनता और उठाता है।
2. राष्ट्रीय मुद्दों के साथ छात्र हित का तालमेल
ABVP ने इस चुनाव में न सिर्फ विश्वविद्यालय के मुद्दों को उठाया बल्कि उन्हें राष्ट्रीय विमर्श से भी जोड़ा। कैंपस में सीटों की कमी, छात्रावास सुविधाएं, परीक्षा परिणामों में देरी और प्लेसमेंट से जुड़े सवालों के साथ ABVP ने “राष्ट्रवाद” और “विकास” का नारा भी दिया। यह मिश्रण छात्रों को आकर्षित करता है क्योंकि उन्हें लगता है कि स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ देश के बड़े मुद्दों पर भी उनकी आवाज़ जुड़ेगी।
3. विपक्ष की बिखरी रणनीति
DUSU चुनाव में ABVP के सामने सबसे बड़ी चुनौती हमेशा NSUI और Left यूनिटी रही है। लेकिन इस बार विपक्ष एकजुट नहीं दिखा। NSUI और वामपंथी छात्र संगठनों में तालमेल की कमी और उम्मीदवारों पर अंतिम समय तक खींचतान ने छात्रों के बीच यह संदेश दिया कि विपक्ष संगठित नहीं है। इसका सीधा लाभ ABVP को मिला।
4. युवाओं में राष्ट्रवादी भावनाओं का उभार
पिछले कुछ वर्षों से विश्वविद्यालय के छात्रों में राष्ट्रवादी सोच का झुकाव बढ़ा है। ABVP ने इसे बखूबी भुनाया। “मजबूत भारत”, “सुरक्षित छात्र” और “सशक्त विश्वविद्यालय” जैसे नारे युवाओं की आकांक्षाओं से मेल खाते हैं। यही कारण है कि ABVP की विचारधारा से जुड़े उम्मीदवारों को छात्रों ने भारी संख्या में समर्थन दिया। जिससे DU: ABVP की भारी जीत का कारण है
5. सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल
आधुनिक दौर में चुनाव सिर्फ पोस्टर और बैनर तक सीमित नहीं रह गए हैं। इंस्टाग्राम, X (Twitter), फेसबुक और यहां तक कि व्हाट्सऐप ग्रुप तक ABVP की टीम ने मजबूत पकड़ बनाई। छोटे-छोटे वीडियो, मीम्स और लाइव कैंपेन के जरिए उन्होंने छात्रों के बीच सीधे संवाद स्थापित किया। डिजिटल रणनीति ने विशेषकर नए मतदाताओं को अपनी ओर खींचा। जिससे मुख्यत DU: ABVP की भारी जीत का मुख्य कारण साबित हुआ है।
6. पिछले कार्यकाल का रिकॉर्ड
ABVP ने पिछले कार्यकाल में छात्र हित में कई मुद्दे उठाए थे—जैसे परीक्षा शुल्क में कटौती की मांग, छात्रावास सुविधाओं में सुधार और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रस्ताव। छात्रों ने इन प्रयासों को याद रखा और एक बार फिर उसी संगठन पर भरोसा जताया। DU: ABVP की भारी जीत का कारण है
DU: ABVP की भारी जीत 3–1 के अंतर से जीत की कहानी
इस बार के चुनावी नतीजों में अध्यक्ष (President), उपाध्यक्ष (Vice President) और सचिव (Secretary) पद ABVP के खाते में गए, जबकि संयुक्त सचिव (Joint Secretary) का पद विपक्षी छात्र संगठन के पास चला गया। यह नतीजे बताते हैं कि छात्रों ने एक बार फिर बड़े बहुमत से ABVP की नीतियों और उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 DU: ABVP की भारी जीत में यह दर्शाती है कि संगठन ने न केवल अपने मजबूत ढांचे और विचारधारा से छात्रों को जोड़ा, बल्कि विपक्ष की कमज़ोरियों का भी पूरा लाभ उठाया। छात्रों ने स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को भी महत्व दिया और ABVP को अपने प्रतिनिधि के रूप में चुना।
इस चुनावी नतीजे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि DU न सिर्फ राजधानी बल्कि पूरे देश की राजनीति का आईना है। और अगर यह रुझान आगे भी कायम रहा तो राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका असर साफ़ तौर पर देखा जा सकता है।
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