कौन होगा CM उम्मीदवार? तेजस्वी की दावेदारी पर कांग्रेस चुप, INDIA गठबंधन में दरार के संकेत!

By himanshu gupta

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कौन होगा CM उम्मीदवार? तेजस्वी की दावेदारी पर कांग्रेस चुप

INDIA महागठबंधन में तेजस्वी का CM Face को लेके हुआ तना–तनी। कांग्रेस नहीं दे रहा कोई साफ जवाब हुआ बड़ा विवाद जाने पूरी खबर।

INDIA गठबंधन के भीतर एक बार फिर से राजनीतिक खींचतान सामने आई है। बिहार में विधानसभा चुनाव धीरे–धीरे नजदीक आते दिख रहे हैं और ऐसे में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। महागठबंधन के अहम घटक दलों – राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस – के बीच मतभेद तेज हो गए हैं।

तेजस्वी यादव की दावेदारी पर अड़े लालू यादव(RJD)

राष्ट्रीय जनता दल लंबे समय से साफ कर चुका है कि अगर बिहार में महागठबंधन सत्ता में आता है तो तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे। तेजस्वी यादव ने खुद कई बार यह बात सार्वजनिक मंच से कही है कि वे युवा नेताओं में सबसे आगे हैं और जनता भी उन्हें स्वीकार करती है।

RJD के भीतर से लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि गठबंधन जल्दी से जल्दी तेजस्वी के नाम को आधिकारिक रूप से घोषित करे ताकि चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान तेज़ी से आगे बढ़ाया जा सके।

तेजस्वी के समर्थकों का कहना है कि उनकी लोकप्रियता युवाओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सबसे ज्यादा है। उन्हें जनता का “नेचुरल चॉइस” बताते हुए RJD का दबाव बढ़ता जा रहा है कि महागठबंधन में जल्द से जल्द उनकी उम्मीदवारी का ऐलान हो।

लालू यादव का सख्त रुख

लालू प्रसाद यादव ने भी इस बार साफ कर दिया है कि पार्टी किसी भी हाल में अपने स्टैंड से पीछे नहीं हटेगी। सूत्रों की मानें तो लालू यादव का कहना है कि कांग्रेस को अब फैसला लेना होगा, क्योंकि “बिना चेहरे” के चुनाव लड़ना महागठबंधन को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि RJD अकेले चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेगी, अगर कांग्रेस लगातार टालमटोल करती रही।

लालू का यह कड़ा रुख कांग्रेस पर दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है। RJD चाहती है कि सीटों के बंटवारे से पहले ही CM Face का मुद्दा सुलझा दिया जाए।

तेजस्वी यादव की दावेदारी पर अड़े लालू यादव(RJD)
तेजस्वी यादव की दावेदारी पर अड़े लालू यादव(RJD)

 

बढ़ती तना–तनी और अंदरूनी राजनीति पर टिप्पणी

महागठबंधन के भीतर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने को लेकर जो विवाद सामने आया है, वह सिर्फ नेतृत्व का झगड़ा नहीं बल्कि गहरी अंदरूनी राजनीति का संकेत है।

1. तेजस्वी की लोकप्रियता बनाम कांग्रेस की अनिर्णय

  • तेजस्वी यादव इस समय बिहार की विपक्षी राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं।
  • लेकिन कांग्रेस उनकी दावेदारी पर खुलकर सहमति नहीं दे रही, क्योंकि वह खुद को “मजबूत हिस्सेदार” दिखाना चाहती है।

2. लालू यादव का दबाव

  • लालू यादव ने कांग्रेस को सीधा संदेश दिया है कि अब और देर नहीं की जा सकती।
  • इससे यह साफ है कि RJD अपनी जमीन और वोट बैंक पर भरोसा करते हुए कांग्रेस पर दबाव बना रही है।

3. गठबंधन की एकजुटता पर सवाल

  • वामपंथी दल और छोटे सहयोगी चिंतित हैं कि इस तरह की तना–तनी से जनता में गलत संदेश जाएगा।
  • भाजपा–जदयू गठबंधन एकजुट होकर चुनाव की तैयारी में जुटा है, ऐसे में विपक्षी खेमे की यह खींचतान उन्हें अप्रत्यक्ष फायदा पहुंचा सकती है।

4. अंदरूनी राजनीति का खेल

  •  कांग्रेस सीट बंटवारे और सत्ता साझेदारी पर पहले गारंटी चाहती है।
  • वहीं RJD मान रही है कि उसके बिना महागठबंधन का कोई राजनीतिक अस्तित्व नहीं। यही वजह है कि दोनों दल अपने–अपने समीकरण साधने में लगे हैं।

महा गठबंधन में बेचैनी

इस विवाद से महागठबंधन के अन्य सहयोगी दल भी असहज महसूस कर रहे हैं। वामपंथी दलों का मानना है कि जनता के सामने इस प्रकार की अंतर्कलह का संदेश नहीं जाना चाहिए, वरना विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो जाएंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर विवाद ज्यादा गहरा गया तो भाजपा और जदयू को इसका सीधा फायदा मिलेगा। दोनों दल पहले से ही एकजुट हैं और महागठबंधन के भीतर की खींचतान विपक्षी वोट बैंक को कमजोर कर सकती है।

आगे की राह

फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। तेजस्वी और RJD पूरी मजबूती के साथ अपनी दावेदारी पर अड़े हैं, वहीं लालू यादव के रुख ने कांग्रेस पर दबाव और बढ़ा दिया है। अगर कांग्रेस झुकती है तो तेजस्वी को महागठबंधन का चेहरा बनाकर चुनावी प्रचार तेज हो सकता है। लेकिन अगर विवाद सुलझा नहीं, तो विपक्षी खेमे में दरार पड़ना तय है।

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हिमांशु गुप्ता | प्रोफेशनल कंटेंट राइटर एवं डिजिटल जनरलिस्ट रचनात्मक लेखन और डिजिटल रणनीति में निपुण, ब्रांड्स और व्यक्तियों को प्रभावशाली कंटेंट व डिजिटल पहचान बनाने में मददगार।

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