राहुल के दबाव में झुके मोदी: 2 साल बाद मणिपुर दौरे का सच

By himanshu gupta

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राहुल के दबाव में झुके मोदी

राहुल गांधी के आगे फिर झुका निर्मम तानाशाह। अगर राहुल न होते तो मोदी मणिपुर कभी न जाते। जाने पूरी खबर

“कहते हैं कि झुकती है दुनिया, बस झुकाने वाला होना चाहिए।”

भारत की राजनीति में अक्सर यह कहा जाता है कि सच्चा विपक्ष सत्ता के अहंकार को आईना दिखाने का काम करता है। हाल के दिनों में इसका उदाहरण मणिपुर घटनाक्रम में साफ नज़र आया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आखिरकार उस राज्य का दौरा करना पड़ा, जिसे लेकर पिछले एक साल से देश में गहरी चिंता और नाराज़गी बनी हुई थी। यह दबाव किसी और ने नहीं बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बनाया।

मणिपुर में पिछले साल से जारी हिंसा ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया, सैकड़ों की जान गई और समाज की एकता पर गहरी चोट पहुंचाई। दुर्भाग्य की बात यह रही कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय तक मणिपुर जाने से बचते रहे। जबकि हर मौके पर “सबका साथ, सबका विकास” की बात करने वाली केंद्र सरकार ने इस मामले में लगभग चुप्पी साध ली थी।

राहुल गांधी ने इस मौन और उदासीनता को चुनौती दी। वे खुद कई बार मणिपुर गए, राहत शिविरों में पीड़ितों से मुलाकात की, उनकी तकलीफ़ें सुनीं और देश का ध्यान इस मानवीय संकट की ओर खींचा। उन्होंने संसद से लेकर सड़क तक यह सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री आखिर क्यों उस राज्य में जाने से कतराते हैं जहां जनता त्रासदी झेल रही है।

राहुल गांधी के इस लगातार दबाव और जनता के बीच उनकी सक्रिय मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को बदल दिया। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा और सवाल किया कि प्रधानमंत्री हर जगह चुनावी रैलियों में जा सकते हैं लेकिन मणिपुर के आंसू पोंछने क्यों नहीं जाते। यही वह दबाव था जिसने अंततः मोदी सरकार को झुकने पर मजबूर किया।

अब आप ही देख लीजिए जो मोदी मणिपुर का नाम सुनते ही विदेश भाग जाते थे, अब उसी मोदी को मणिपुर जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। वरना जब मणिपुर जल रहा था तब प्रधानमंत्री बांसुरी बजा रहा था।

आखिरकार 2 साल बाद मोदी का मणिपुर दौरा

मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राज्य में दौरा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है — यह उनका मई 2023 में शुरू हुई हिंसा के बाद पहला संभव दौरा होगा ।ये संभव होने का कारण निम्न है–

दबाव का असर

कांग्रेस और राहुल गांधी ने कई मौकों पर प्रधानमंत्री से मणिपुर का दौरा करने की मांग की।

राहुल गांधी ने दावा किया कि यदि पीएम आरोपी के रूप में खुद वहां जाते और पीड़ित जनता से मिला करते तो हालात बेहतर होते ।

मणिपुर में लोगों को विश्वास

  •  प्रधानमंत्री का दौरा मणिपुर की जनता के लिए एक उम्मीद — जो हिंसा और उपेक्षा के बाद प्रतीक्षित था।
  • राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं के निरंतर दबाव ने सरकार को कार्रवाई करने पर मजबूर किया।
  • सरकार द्वारा उठाए गए शांति प्रयास (रास्‍ते खोलना, समझौते, संसाधन जुटाना) इस दौरे को एक व्यापक रणनीतिक पहल का हिस्सा बतलाते हैं।
  • यह दौरा लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ और लोकतांत्रिक दबाव के प्रभाव की पुष्टि भी है।

लोकतंत्र की जीत या मजबूरी?

  • यह घटनाक्रम दिखाता है कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका कितनी अहम है।
  • अगर राहुल गांधी यह मुद्दा लगातार न उठाते तो शायद प्रधानमंत्री अब भी वहां न जाते।
  • जनता की तकलीफ़ों को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रहा।

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हिमांशु गुप्ता | प्रोफेशनल कंटेंट राइटर एवं डिजिटल जनरलिस्ट रचनात्मक लेखन और डिजिटल रणनीति में निपुण, ब्रांड्स और व्यक्तियों को प्रभावशाली कंटेंट व डिजिटल पहचान बनाने में मददगार।

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