सिवान में राहुल गांधी की यात्रा के बीच हंगामा, एक ओर स्वागत तो दूसरी ओर पुतला दहन!

By himanshu gupta

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सिवान में लोगों ने जलाया राहुल गांधी का पुतला

एक तरफ Bihar के सिवान में राहुल गांधी का यात्रा। वहीं दूसरी तरफ सिवान में ही लोगों ने जलाया राहुल गांधी का पुतला। हुआ बड़ा बवाल जाने पूरी खबर

Bihar के सिवान ज़िले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की यात्रा को लेकर बड़ा हंगामा देखने को मिला। एक ओर जहाँ राहुल गांधी सिवान पहुँचे और उनकी यात्रा को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया, वहीं दूसरी ओर सिवान के महाराजगंज में विरोध प्रदर्शन छिड़ गया।

महाराजगंज में ग़ुस्साए लोगों ने राहुल गांधी का पुतला फूँकते हुए तेज़ आवाज़ में नारे लगाए— “राहुल गांधी मुर्दाबाद!”, “देश के गद्दार को वापस भेजो!”, “भारत तोड़ने वालों को सिवान में जगह नहीं मिलेगी!”। पुतला जलाने के दौरान लोगों ने उन पर देशविरोधी और बेतुके बयानों का आरोप लगाते हुए खूब हूटिंग की।

पुतला दहन के दौरान कांग्रेस समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए। जिससे माहौल पूरा गरमा गया और कुछ देर तक अफरा-तफरी की स्थिति रही।हालांकि प्रशासन ने हालात बिगड़ने से पहले ही भीड़ को काबू कर लिया।

राहुल गांधी की इस यात्रा ने साफ़ कर दिया है कि सिवान में उनका दौरा जहाँ एक ओर समर्थकों के लिए उत्साह का विषय है, वहीं दूसरी ओर कड़ा विरोध और गुस्से की लहर भी मौजूद है।

Bihar चुनाव पर पड़ेगा असर

राहुल गांधी की सिवान यात्रा पर हुआ पुतला दहन अब सिर्फ़ स्थानीय घटना नहीं रहा, बल्कि यह बिहार की राजनीति का गरम मुद्दा बन गया है। सवाल यह है—क्या Bihar की जनता राहुल के स्वागत को याद रखेगी या उनके पुतले के जलने को?

कांग्रेस कह रही है कि “जनता का प्यार राहुल जी के साथ है, कुछ विरोधी ताक़तें मुद्दे से भटका रही हैं।”

वहीं विपक्ष खुलकर हमला बोल रहा है—“राहुल गांधी को बिहार में कोई स्वीकार नहीं करता, जनता ने पुतला जलाकर साफ़ कर दिया है।”

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस घटना का सीधा असर चुनावी रणनीति पर पड़ेगा। कांग्रेस जहाँ इसे “सहानुभूति वोट” में बदलने की कोशिश करेगी, वहीं विरोधी दल इसे “जनता का गुस्सा” बताकर मैदान में उतारेंगे।

राहुल गांधी गठबंधन के लिए वरदान या अभिशाप:

एक तरफ राहुल गांधी का रोड शो, जनसभाएँ और कांग्रेस की नई उम्मीदें… और दूसरी तरफ पुतला दहन, नारेबाज़ी और जनता का गुस्सा। अब बड़ा सवाल यही—क्या राहुल गांधी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के लिए वरदान हैं या फिर अभिशाप?

समर्थक कहते हैं –

राहुल गांधी महागठबंधन का चेहरा हैं, उनकी मौजूदगी से युवाओं और किसानों की आवाज़ उठ रही है। कांग्रेस को नया जोश मिल रहा है।

विरोधी पलटवार करते हैं –

राहुल गांधी बिहार की ज़मीन से कटे हुए हैं, जनता उन्हें स्वीकार नहीं करती। पुतला जलना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। राहुल की वजह से महागठबंधन कमज़ोर होगा।

विशेषज्ञ मानते हैं –

बिहार में जातीय समीकरण और क्षेत्रीय दल ही असली खिलाड़ी हैं। राहुल गांधी केवल माहौल बना सकते हैं, लेकिन चुनाव जीतने की गारंटी नहीं दे सकते।

क्या उनकी मौजूदगी महागठबंधन को ताक़त देगी या विपक्ष के लिए हथियार?

राहुल गांधी की मौजूदगी महागठबंधन को दो तरह का असर देती है—

ताक़त इसलिए, क्योंकि कांग्रेस का राष्ट्रीय चेहरा मैदान में आता है। राहुल गांधी से गठबंधन को “दिल्ली कनेक्शन” और युवाओं–किसानों के मुद्दों पर बड़ी आवाज़ मिलती है। इससे महागठबंधन का मनोबल और वोट बैंक मज़बूत हो सकता है।

विपक्ष का हथियार इसलिए, क्योंकि राहुल गांधी पर हमेशा “कमज़ोर नेता” और “ज़मीन से कटे” होने का ठप्पा लगता रहा है। पुतला दहन जैसी घटनाओं को विपक्ष खूब भुनाएगा और जनता में यही संदेश फैलाएगा कि “राहुल गांधी का कोई जनाधार नहीं, कांग्रेस सिर्फ बोझ है।”

नतीजा साफ़ है:
राहुल गांधी की मौजूदगी महागठबंधन के लिए सहारा भी है और जोखिम भी। अब यह इस पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस और उसके साथी इस मौजूदगी को **“मौका” बनाते हैं या विपक्ष इसे “कमज़ोरी” में बदल देता है।

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हिमांशु गुप्ता | प्रोफेशनल कंटेंट राइटर एवं डिजिटल जनरलिस्ट रचनात्मक लेखन और डिजिटल रणनीति में निपुण, ब्रांड्स और व्यक्तियों को प्रभावशाली कंटेंट व डिजिटल पहचान बनाने में मददगार।

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